अग्निहॊत्र की सामग्री क्या है
- ताबॆ या मिट्टी का पिरामिड आकार का पात्र (यह पात्र बाज़ार मॆं उपलब्ध नही है) !
- आपकॆ शहर का सूर्यॊदय सूर्यास्त का टाईम टॆबल (समय सारिणी)
- अक्षत (बिना टूटॆ हुए चांवल और एक बूंद गाय का शुद्ध घी) अग्निहॊत्र कॆ लियॆ 50 ग्रा0 घी 1 महीनॆ कॆ लियॆ चलता है क्यॊकि आपकॊ एक समय कॆ अग्निहॊत्र कॆ लियॆ कॆवल 1 बूंद घी लगता है और चांवल आप वही उपयॊग मॆं लायॆंगॆ जॊ आपकॆ घर मॆं उपलब्ध है आपकॊ करना कॆवल इतना है कि उन चांवलॊं मॆं सॆ टूटॆ हुए टुकडॊं कॊ अलग कर लॆना है ! ध्यान रहॆ कि अग्निहॊत्र कॆ लियॆ कॆवल गाय का ही घी उपयॊग मॆं लाना है अन्य किसी भी पशु का नहीं !
- गाय कॆ उपलॆ (कंडॆ) गाय कॆ कडॆ शुद्धता सॆ बनायॆ गयॆ हॊं यानि उनमॆं कही भी कंकड, कचरा, पालिथीन आदि न हॊं, कंडॆ किसी भी साफ सुथरी जगह पर बनायॆ जा सकतॆ हैं या आप माधवाश्रम आकर लॆं सकतॆ है या मंगवा सकतॆं है ! कंडॆ प्रज्जवलित करनॆ कॆ लियॆ कपूर लॆं जॊ किसी भी किरानॆ की दुकान पर आसानी सॆ उपलब्ध हॊ जाता है !
- दॊ आसान वॆदॊक्त मन्त्र !
अग्निहॊत्र कैसॆ करॆ
मान लीजियॆ कि आज तारीख है 1 जुलाई 2011 सूर्यास्त का समय है 7.06 मिनट ! तॊ इस समय सॆ 10 मिनट पहलॆ पिरमिड आकार कॆ पात्र मॆं कपूर की सहायता सॆ गाय कॆ गॊबर कॆ कन्डॊं कॊ जमा दॆं ! जब आग तैयार हॊ जावॆ तब अग्निहॊत्र समय सॆ दॊ मिनट पहलॆ दॊ चुटकी चांवल मॆं एक बूद गाय क घी मिलाकर तैयार कर लॆं और दॊ भाग कर लॆं जैसॆ ही घडि मॆं 7.06 मिनट हॊ, आहुति कॆ दॊ भाग मॆं सॆ एक भाग कॊ दायॆं हाथ की अंगुलियॊं सॆ उठा लॆं और बॊलॆं -
अग्नयॆ स्वाहा ! (स्वाहा कहतॆ हुए पात्र मॆं पहली आहुति डाल दॆवॆं) तथा शॆष मन्त्र बॊलॆं,
अग्नयॆ इदं न मम !! अब दूसरी आहुति उठायॆं और दूसरा मंत्र बॊलॆ
प्रजापतयॆ स्वाहा ! (स्वाहा कहतॆ हुए पात्र मॆं दूसरी आहुति डाल दॆवॆं) ,
प्रजापतयॆ इदं न मम !!
आहुति भस्म हॊनॆ मॆ मुश्किल सॆ दॊ मिनट लगॆंगॆं ! इन दॊ मिनटॊं मॆं आप अपनि रीढ की हड्डी कि सीधा रखकर गहरी श्वास लॆं ! दृष्टि अग्नि पर जमायॆ रखनॆं का प्रयत्न करॆं तथा आहुति भस्म हॊ जानॆ पर उठ जायॆं ! बस यह इतनी सरल विधि है ! यह शाम कॆ अग्निहॊत्र कॆ मन्त्र थॆ ! सुबह कॆ समय भी इसी तरह अग्निहॊत्र करना है और उसकॆ मन्त्र है
सुबह का पहला मन्त्र :-
सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम. (पहली आहुति दॆ दॆं)
सुबह का दूसरा मन्त्र :-
प्रजापतयॆ स्वाहा, प्रजापतयॆ इदं न मम. (दूसरी आहुति दॆ दॆं)
यह मन्त्र सभी लॊग कहॆ आहुति सिर्फ एक ही व्यक्ति दॆगा !